संस्कृति क्या है ? | गद्य संकलन | Workbook Solutions | Class 11th & 12th | ISC Board

Workbook Answers of SANSKRITI KYA HAI ?

अभ्यास माला

1. सभ्यता को समझे बिना संस्कृति को समझना अत्यंत कठिन क्यों है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उतर. संस्कृति एक ऐसा शब्द है, जिसका उपयोग अधिकतर होता है। परन्तु उसको समझना बहुत कठिन है।

लेखक ने सभ्यता के माध्यम से संस्कृति को समझाने का प्रत्यन किया है। सभ्यता के बिना संस्कृति को समझना अत्यंत जटिल है। क्योंकि दोनों एक दूसरे के पर्याय है। सभ्यता स्थल वस्तुओं पर निर्भर है। अपितु संस्कृति हमारी प्रत्येक वस्तुओं का उपयोग करने का तरीका है। उदाहरण के लिए मंँहगे वस्त्र पहन लेना हमारी सभ्यता को नहीं दर्शाता है, अपितु अपने देश या धर्म के अनुरूप पहनना हमारी संस्कृति को दर्शाता है।

लेखक के मतानुसार सभ्यता हमारे मौलिक एवं भौतिक शरीर का एक हिस्सा ही है। हमारी भूलोक के जाने के बाद हमारी सभ्यता यहीं रह जाती है। इसके विपरीत संस्कृति और संस्कार हमारी आत्मा का गुण है, यह हमारे साथ सदैव रहता है।

संस्कृति हमारे पूर्ण जन्म पर निर्भर होती है यदि कोई बालक बालिकाओं अपनी सामर्थ्य से अधिक जानते हैं तो हम कहते हैं कि वह बहुत बुद्धि वाला है यह उनकी पूर्व जन्म का संस्कार है।

लेखक के अनुसार सभ्यता और संस्कृति में सभ्यता दृष्टिकोचर होती है, जबकि संस्कृति उसे सजाती एवं सँवारती है। जिस प्रकार दूध में घी और फूलों में सुगंध छुपी होती है। उसी प्रकार सभ्यता में संस्कृति का निवास होता है ।

संस्कृति व्यक्ति का मूल आधार है। ऐसा संभव है कि सभ्यता का विनाश हो सकता है परंतु संस्कृति का नहीं।

2. संस्कृति सौ पचास साल में परिपुष्ट न होकर हजारों सालों में भी पूर्ण क्यों नहीं हो सकती? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर. संस्कृति ऐसी वस्तु नहीं है जिसकी रचना हम दस बीस या सौ पचास वर्षों में होती है। अनेक शताब्दी के लोग जिस तरह खाते पीते, रहते ,पढ़ते लिखते, सोचते समझते और राजकाज चलाते हैं ,धर्म कर्म करते इन सभी कार्यों में उनकी संस्कृति जिम्मेदार होती है। यहांँ तक कि हमारी उठने बैठने घूमने फिरना भी हमारी संस्कृति होती है।

वास्तव में संस्कृति जीवन का वह तरीका है जो सदियों से जमा होकर उस समाज में रहती है। जहांँ पर हम जन्मे है और जिस समाज अथवा जिस परिवेश में रहकर हमारा पालन-पोषण हुआ है। उसकी छाप कहीं न कहीं हमारे व्यवहार में दृष्टिव्य होती है जो संस्कार हमें जन्म से दिए गए हैं वह संस्कार कहीं न कहीं जाकर हमारी संस्कृति और हमारी सभ्यता को इंगित (दर्शाते) करते हैं।

इस प्रकार स्पष्ट है कि सभ्यता की अपेक्षा संस्कृति कहीं अधिक चिरजीवी होती है। जैसे जैसे मानव का विकास हुआ वैसे ही उनकी संस्कृति का विकास हुआ है और होता रहेगा।

सामान्य वादी संस्कृति के दृष्टिकोण से यदि देखा जाए तो भारतीय संस्कृति अन्यतम (उच्चतम) है, लेखक के अनुसार संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान-प्रदान सी पोस्ट होती है भारत की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति ऐसी है कि यहां अनेक देशों से लोग आते रहते हैं और यहीं पर बसना भी चाहते हैं और उनकी संस्कृति और भारतीय संस्कृति ऐसे घुलमिल जाती है जैसे दूध में पानी। वास्तव में हमारे भारत भूमि में ही अधिक से अधिक जातियांँ एवं उनकी संस्कृति पाई जाती है।

3. संस्कृति एक कला है जीने का तरीका है कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए साथ ही यह भी बताइए कि किस दृष्टिकोण से भारत और भारतीय संस्कृति सबसे आगे है आधुनिक परिपेक्ष से उदाहरण दीजिए।

उत्तर. यह कथन पूर्णतः सत्य है – “ संस्कृति एक कला है एवं जीने का तरीका है”।

लेखक के शब्दों में – ‘असल में, संस्कृति जिंदगी जीने का एक तरीका है और यह तरीका सदियों से जमा होकर उस समाज में छाया रहता है। जिसमें हम जन्म लेते हैं।

आर्यों द्वारा समाज का श्रम विभाजन करना उनकी संस्कृति का परिचायक है भले ही वह विभाजन जाति प्रथा में बदल गया है। किन्तु अभी भी लोगों के अंदर संस्कृति जीवित है ।

संपूर्ण आयु को चार आश्रमों में बाटा गया है। 25 वर्षों तक अध्ययन अर्थात शिक्षा ग्रहण करना और फिर गृहस्थ आश्रम में प्रवेश। 50 वर्ष के पश्चात वनप्रस्थान और तत्पश्चात सन्यास।

लेखक का मत है कि संस्कृति का स्वभाव है कि वह आदान-प्रदान से परिपुष्ट होती है।

भारत की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति ऐसी रही है कि यहाँ अनेक देशों से लोग आते रहे हैं। वे यहाँ बस भी गये और उनकी संस्कृति भी यहाँ की संस्कृति में ऐसी घुल-मिल गई जैसे पानी। भारत धर्म गुरु के पद पर आसीन रहा है। अनेक विदेशी यहाँ शिक्षा ग्रहण करने आये, जैसे ह्वेन सांग और फाहियान । भारतीय संस्कृति में समन्वय का गुण है। वह देना और लेना दोनों जानती है। भारत के पड़ोसी देशों पर भारतीय संस्कृति की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। दूध में प्राचीनकाल से ही दुनिया के अनेक देशों से व्यापारिक सम्पर्क रहने के कारण वहाँ की संस्कृति यहाँ ऐसी रच बस गई है कि उसको अलग करना कठिन ही नहीं, असम्भव है। हमारे साहित्य पर भी विदेशी साहित्यकारों का गहरा प्रभाव पड़ा है। रवीन्द्रनाथ जैसे कवि उसी की देन हैं। हिन्दी ही नहीं सभी भारतीय भाषाओं के साहित्य पर योरोपीय साहित्य का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

प्रस्तुत अवतरण से यह स्पष्ट होता है कि संस्कृति एक कला है जीने का तरीका है एवं भारत और भारतीय संस्कृति सबसे अलग है।

  1. साखी साहित्य सागर (Sahitya Sagar) Workbook Answers Class 9 and 10 ICSE Board

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